Sunday, December 4, 2022
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    अंतर्राष्ट्रीय सनातन परिषद ने किया जन जागरण अभियान का आयोजन स्कन्द पुराण के वैष्णव खंड कार्तिकेय महात्मय का किया वर्णन

    द स्वार्ड ऑफ़ इंडिया
    रामकृष्ण मिश्रा,
    लखनऊ ।
    बुधवार को international सनातन परिषद की ओर से जन जागरण अभियान का आयोजन किया गया। आगामी दीपावली के पावन पर्व पर हिन्दू सामाज में जो ये भावना बैठा दी गयी थी की पटाखे सिर्फ हर्ष ओ उल्लास के लिए जलाये जाते हैं, इसका हिन्दू रीती रिवाज या आस्था से कोई सम्बन्ध नहीं है।

    इससे व्यापारी और समाज के लोगों में उदासीनता और संशय की स्थिति बनने लगी। कुछ लोग व संगठन यहाँ तक की कुछ सरकारें भी माननीय सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचीं, की पटाखे फोड़ने से प्रदूषण होता है, इसका कोई भी सरोकार आस्था से नहीं है इसको बंद कर दिया जाना चाहिए।

    तो इसके विरुद्ध आवाज़ बुलंद करते हुए अंतर्राष्ट्रीय सनातन परिषद के संस्थापक व अध्यक्ष मयंक श्रीवास्तव ने कहा की पौराणिक समय से ही हिन्दू या सनातन समाज पटाखे जलाता आया है। जिस प्रकार रात को किसी हवाई जहाज़ के उतरने के लिए एयरपोर्ट पर एयरस्ट्रिप के दोनों ओर लाइट जला दी जातीं हैं ।

    ताकि ऊपर आसमाँ में उड़ते हवाई जहाज़ के पायलट को ये समझ आये की उसे हवाई जहाज़ उतारना कहाँ है, ठीक उसी प्रकार सनातन समाज में पितरों का एक अलग ही महत्व हैं। हर शुभ कार्य के लिए पितरों का आवाहन किया जाता हैं, फिर चाहे वो जन्म हो, विवाह हो, गृह प्रवेश हो या अंत्येष्टि हो।

    मयंक श्रीवास्तव ने स्कन्द पुराण के वैष्णव खंड कार्तिकेय माहात्म्य का वर्णन करते हुए बताया की जो स्पार्कल्स / फुलझड़ियां हम जलाते हैं उसको संस्कृत में उल्कदाम कहतें हैं। ” अत्रास्त समये उल्कादनं विहितं ज्योति निर्बन्धे तुला सहस्त्रांशों प्रदोषे भूत दर्शयो:। उल्काहस्ता नरः , कुर्युः पितृणां मार्ग दर्शनम।। ” अर्थात दीपावली के दिन अमावस की अँधेरी रात में भी जब मनुष्यों द्वारा हाथों में “उल्कादाम” फुलझड़ियों को लेकर अपने पितरों को मार्ग अवलोकित कर आमंत्रित किया जाता हैं। श्लोक नं० 8 कहता है की ” उल्का शिरसि विशाला , निपतन्ति वर्धते प्रतनुपुच्छ। दीर्घा च भवति भेदा , बहवो भवान्तस्य:।। अर्थात उल्का या राकेट का अग्रभाग चौड़ा होता है जिसके पीछे एक महीन पूँछ नीचे की ओर गिरती प्रतीत होती है और उसका आकार बढ़ता है।

    जिसकी लम्बाई साढ़े तीन क्यूबिक यूनिट तक होती है और ये अनेक पकार के आते हैं।
    इन्ही श्लोकों के साथ अंतर्राष्ट्रीय सनातन परिषद के संस्थापक व अध्यक्ष मयंक श्रीवास्तव ने सकल सनातन समाज को अपने रीति और आस्था के विषयों पे जागरूक होने को कहा । साथ ही उन्होंने उचित सावधानी का ख़याल रखने के लिए भी व्यापारियों और जनता का आह्वाहन किया ताकि हम सभी एक सफल जगमगाती दीपावली मनाएं।

    ज्ञात होकि मयंक श्रीवास्तव अंतर्राष्ट्रीय सनातन परिषद के संस्थापक व अध्यक्ष के साथ साथ प्राइम प्लाजा वेलफेयर सोसाइटी के संरक्षक भी हैं। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय सनातन परिषद पत्रकार संघ का भी संस्थापन कर विभिन्न प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया हाउसेस और पत्रकारों छायाकारों के कल्याण के लिए कार्य किया और सतत उनके प्रयास जारी भी है।

    international

    उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय सनातन परिषद की भविष्य की कार्य योजना के अंतर्गत एक अंतर्राष्ट्रीय सनातन परिषद विधि संघ के निर्माण की परियोजना पर प्रकाश डाला। विधि संघ के द्वारा आम शोषित समाज को सहज कानूनी सहायता प्रदान करने की उनकी व उनके संगठन की इच्छा है।

    संपादकhttps://epaper.theswordofindia.com/
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