Wednesday, February 8, 2023
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    कानपूर के अपोलो स्पेक्ट्रा अस्पताल में 70 वर्षीय महिला पर तीसरी बार हिप रिप्लेसमेट हुई सफलतापूर्वक सर्जरी

    द स्वार्ड ऑफ़ इंडिया
    कानपुर ।
    Apollo hospital– लखनऊ में रहनेवाली एक 70 वर्षीय महिला पर एक जटील हिप रिप्लेसमेंट रिवीजन सर्जरी की गई हैं। इस महिला ने यह सर्जरी तीसरी बार करवाई हैं। दो बार महिला ने कि हिप रिप्लेसमेट सर्जरी सफल नही हुई थी। लेकिन अभी कानपूर स्थित स्पेक्ट्रा अस्पताल के डॉक्टरोंने यह महिला पर हिप रिप्लेसमेट सर्जरी सफलतापूर्वक की हैं। यह सर्जरी के बाद अब महिला फिर से अपने पैरों पर खडी हुई हैं।

    चंद्रा सिंह यह महिला घर में काम करते समय गिर गई। हिप फ्रैक्चर होने के कारण उन्हें तुरंत स्थानीय अस्पताल दाखिल किया गया। कूल्हे की 2 सर्जरी कराने के बाद भी मरीज को राहत नहीं मिली। कूल्हे का दर्द बढता जा रहा था। असहनीय दर्द के कारण महिला की दैनिक गतिविधियां कम होने लगी थी। महिला की बिघडती सेहत को देखकर परिवारवालों ने उन्हें कानपूर के अपोलो स्पेक्ट्रा अस्पताल दाखिल किया।

    कानपूर के अपोलो स्पेक्ट्रा अस्पताल के आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. मानव लूथरा ने कहा, ”यह एक बेहद जटिल हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी थी। क्योंकी मरीज की पहले 2 हिप रिप्लेसमेंट हो चुकी थी। इसलिए दुबारा यह सर्जरी करना काफी चुनौतीपूर्वक था। जख्म और कूल्हे की हड्डी टूट जाने से उसकी हड्डी पूरी तरह नष्ट हो गई थी। बॉल और सॉकेट दोनों को बदलने के लिए टोटल हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी की आवश्यकता थी।

    इसलिए हमने यह सर्जरी करने का निर्णय दिया। यह सर्जरी डेढ घंटे तक चली। सर्जरी के बाद मरीज की सेहत में सुधार देखकर चौंथे दिन उन्हें डिस्जार्च दिया गया। अब वह महिला फिर से अपने पैरों पर चलने लगी हैं।

    मरीज चंद्रा सिंह ने कहॉ की, “घर में गिरने के कारण मेरी कूल्हे की हड्डी टूट गई थी। दो बार मेरी हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी भी हुई, लेकिन कुछ असर नहीं हुआ। मुझे चलना और बैठना काफी कठिण हो गया था। दैनिक गतिविधियों के लिए भी में परिवार के सदस्यों पर निर्भर थी। अपनी स्थिती को देखकर में काफी निराश हो गई थी। क्योंकी मैं चल नहीं पा रही थी।

    Apollo hospital

    लेकिन मेरी बिघडती सेहत को देखकर परिवारवालो ने मुझे अपोलो स्पेक्ट्रा अस्पताल दाखिल किया। केवल डॉक्टरोंने प्रयासों के कारण अब मैं फिर से अपने पैरों पर चल सकती हू। मैं उन डॉक्टरों का शुक्रगुजार हूं जिन्होंने मुझे जीने की नई उम्मीद दी हैं।,”

    संपादकhttps://epaper.theswordofindia.com/
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