Sunday, December 4, 2022
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    Homeखीरीगंगा जमुना तहजीब का प्रमुख केंद्र है नगर पालिका चौराहा

    गंगा जमुना तहजीब का प्रमुख केंद्र है नगर पालिका चौराहा

    द स्वार्ड ऑफ़ इंडिया
    मोहम्मदी-खीरीganga yamuna- में आज भी आपसी भाई-चारे की कोई मिसाल नहीं है। ऐसा प्रतीत होता है जैसा असली हिन्दुस्तान मोहम्मदी वासियो के ही दिलो में बसता है।

    जिसका जीता जागता सबूत है नगर पालिका चौराहा। इस चौराहे पर हिन्दु, मुस्लिम और सिक्ख एकता के नमूने के तौर पर एक पास है भव्य पवन पुत्र हनुमान जी का मन्दिर इसके पीछे भव्य सफेद चमकता गुरूद्वारा और उत्तर को सुनहरी मस्जिद।

    शाम को एक समय ऐसा आता है जब मस्जिद से अजान, मन्दिर से आरती और गुरूद्वारे से शबद कीर्तन की आवाज एक साथ गूजती तो लगता है जैसे र्स्वग-जन्नत से एकता की हवा बह रही हो। यही एकता मोहम्मदी वासियो को आपस में पिरोकर माला की भाति साथ रखे है।

    हनुमान मन्दिर के हुए जीर्रोद्वार के अवसर पर जारी एक फोटो जिसमें ये तीनो धार्मिक स्थल दिखाई दे रहे।
    मोहम्मदी की गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल है नगर पालिका चौराहा जहां ‘‘त्रिवेणी’’ कहती है रोड के उत्तर सुनहरी मस्जिद, रोड के दक्षिण बराबर से पवन पुत्र हनुमान जी का भव्य मन्दिर और इसके पश्चिम दीवार से लगा भव्य सफेद चमकता गुरूद्वारा इस त्रिवेणी में शाम को जब मस्जिद से अज़ान, मन्दिर से आरती और गुरूद्वारे से शबद कीर्तन की आवाजे एक साथ गूजती तो इनसे बहने वाली आवाजो की ध्वनी ऐसी मिठास पैदा करती है जो शायद ही कही देखने को मिलता होगा। भव्यता का रूप धारण किये हनुमान मन्दिर का पिछले कुछ दिनो से जीर्णोद्वार चल रहा था जो अब पूरा होने को आ गया।

    मन्दिर में विराजमान पवन पुत्र की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा एवं जल यात्रा शोभायात्रा व श्रीराम कथा कार्यक्रम जो 18 जनवरी से 29 जनवरी 2020 तक चलेगा। इस संदर्भ में मन्दिर कमेटी की ओर से आयोजित हो चुकी प्रेसवार्ता में जो फोटो प्रेस को देने के साथ-साथ सोशल मीडिया पर वायरल हुआ उसे अत्याधिक लईक किया गया। ये तस्वीर एक ऐसा पैगाम दे गयी जो मोहम्मदी की धार्मिक एकता की मिसाल है। वैसे इससे पूर्व भी जब मोहम्मदी सन् 16 सौ के आस-पास बसी थी।

    तब मुस्लिम बाहुल एक मोहल्ले का नाम देवीस्थान रखा गया यहां एक मन्दिर होता था उसी आधार पर मुस्लिम शासन ने मोहल्ले का नाम देवीस्थान रखा और पूर्ण रूप से हिन्दु बाहुल मोहल्ले का नाम इस्लामाबाद रखा गया। इस हिन्दु मुस्लिम एकता को इस त्रिवेणी ने और बल दिया। मोहम्मदी के इस गंगा-जमुनी तहजीब में शाम को एक साथ मस्जिद से अजान, मन्दिर से आरती और गुरूद्वारे से शब्दकीर्तन सुना जा सकता है जो देश को एकता का संदेश देता है।

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