फतेहपुर बाराबंकी : जमीयत उलमा तमाम तहरीकों की सहयोगी जमात है। मुल्क और मिल्लत की हिफाज़त व बक़ा के लिए जमीयत उलमा लगातार कोशिश करती रहती है।
ज़मीनी और आसमानी आफ़ात से प्रभावित लोगों की राहत और जलते हुए मसलों को हल करने में हमेशा जमीयत उलमा का अहम किरदार रहा है।
तहसील फतेहपुर की यूनिट के चुनावी इजलास को मस्जिद क़िला में संबोधित करते हुए ज़िला जनरल सेक्रेटरी मौलाना मोहम्मद जमाल क़ासमी ने उपरोक्त विचार व्यक्त किए।
ज़िला जमीयत के सचिव मौलाना सैयद अज़हर क़ासमी, नाज़िमे तालीमात जामिया दारुररशाद बंकी ने कहा कि इबादत का मतलब बहुत व्यापक है। इंसानी हमदर्दी और मज़लूमों की मदद भी इबादत के दायरे में आती है।
जमीयत उलमा मौजूदा दौर में हिंदुस्तानियों के लिए एक बड़ी पूंजी है। कारी हस्सान, इमाम मस्जिद क़िला की तिलावत से चुनावी प्रोग्राम की शुरुआत हुई।
इत्तेफ़ाक़े राए से मौलाना साबिर क़ासमी को तहसील का सदर, हाईकोर्ट एडवोकेट अहमद सईद हर्फ़ को महासचिव, हाफ़िज़ खालिद को सचिव और हाजी शेख़ मुतीउल्लाह को कोषाध्यक्ष चुना गया।
नवनिर्वाचित महासचिव ने औक़ाफ़ के संबंध में महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की और ‘उम्मीद पोर्टल पर मौक़ूफ़ा जायदाद के पंजीकरण की अपील की।

इस मौके पर मौलाना मोहम्मद अमीन मज़ाहिरी, एडवोकेट मोहम्मद असलम, मौलाना मोहम्मद नाज़िम बेग, हाजी एजाज़ अहमद, हाफ़िज़ मोहम्मद कलीम क़ुरैशी, मोहम्मद अकीक पप्पू, मुनीर हैदर, निज़ामुद्दीन, मोहम्मद इमरान, मोहम्मद अनस सलमानी, मोहम्मद वसी, मोहम्मद अनवर आदि मौजूद रहे। जमीयत उलमा तहसील फतेहपुर के सदर मौलाना मोहम्मद साबिर क़ासमी की दुआ पर जलसा समाप्त हुआ।
Author: theswordofindia
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