गोरखपुर: बिरला फर्टिलिटी एंड आईवीएफ, गोरखपुर की फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट डॉ. आकृति गुप्ता कहती हैं कि जब दंपत्ति फर्टिलिटी ट्रीटमेंट के लिए क्लिनिक पहुंचते हैं, तो उनका ध्यान मुख्य रूप से हार्मोन, उम्र, मेडिकल टेस्ट और प्रक्रियाओं पर होता है। लेकिन बहुत कम लोग यह समझते हैं कि सही पोषण भी गर्भधारण की संभावना को गहराई से प्रभावित करता है।
डॉ. गुप्ता के अनुसार, लगभग हर फर्टिलिटी केस में आहार (डाइट) एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है — चाहे बात एग्स की गुणवत्ता की हो, स्पर्म की हेल्थ की, ओव्यूलेशन की या फिर एम्ब्रियो इंप्लांटेशन की।

वैज्ञानिक शोध क्या कहता है?
2023 की एक रिसर्च में यह सामने आया कि जिन महिलाओं ने संतुलित और संपूर्ण भोजन अपनाया — जिसमें हरी सब्ज़ियां, साबुत अनाज, दालें और हेल्दी फैट्स शामिल थे — उनमें आईवीएफ के बाद सफल गर्भधारण की संभावना अधिक बढ़ी।
एक अन्य अध्ययन में सामने आया कि ज़िंक, सेलेनियम जैसे मिनरल्स की कमी या भारी धातुओं (heavy metals) के संपर्क से एम्ब्रियो का विकास प्रभावित हो सकता है और फर्टिलिटी ट्रीटमेंट की सफलता दर कम हो सकती है।
खराब खान-पान कैसे नुकसान पहुंचाता है?
डॉ. आकृति बताती हैं कि आज की आधुनिक जीवनशैली में प्रोसेस्ड फूड, जंक फूड और रिफाइन्ड शुगर का सेवन तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे खाने से —
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हार्मोनल बैलेंस बिगड़ता है
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इंसुलिन रेसिस्टेंस बढ़ता है
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ओव्यूलेशन संबंधी समस्याएं उत्पन्न होती हैं
इसके उलट, अगर आहार में एंटीऑक्सिडेंट, फाइबर और ओमेगा-3 फैटी एसिड शामिल हों, तो यह ओवरी की कार्यक्षमता सुधारता है और एग क्वालिटी बेहतर करता है।
डॉ. गुप्ता कहती हैं, “इन सुधारों के नतीजे हमेशा रिपोर्ट में नहीं दिखते, लेकिन यह फर्टिलिटी ट्रीटमेंट की सफलता तय कर सकते हैं।”

भारत में अब भी कम जागरूकता
भारत में फर्टिलिटी केयर को अभी भी केवल मेडिकल ट्रिटमेंट के रूप में देखा जाता है। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि फर्टिलिटी की शुरुआत लाइफ़स्टाइल से होती है — जिसमें डाइट, हाइड्रेशन, नींद और तनाव प्रबंधन शामिल हैं।
डॉ. आकृति के अनुसार, यदि आईवीएफ या किसी भी फर्टिलिटी ट्रीटमेंट से पहले पोषण पर चर्चा हो और सही मार्गदर्शन मिले, तो शरीर ट्रीटमेंट के लिए बेहतर तैयार होता है और परिणाम अधिक पॉज़िटिव हो सकते हैं।
निष्कर्ष — पोषण ही सफलता की पहली सीढ़ी
विज्ञान और तकनीक आज फर्टिलिटी के क्षेत्र में नई संभावनाएं ला रहे हैं, लेकिन डॉ. गुप्ता का स्पष्ट संदेश है:
“शरीर वही बनता है जो हम खाते हैं, और कई बार अच्छी फर्टिलिटी किसी दवाई में नहीं — बल्कि आपकी थाली में छिपी होती है।”
Author: Mohd Asif
Mohd Asif is a Social-political and tech journalist, Urdu poet, and digital strategist with 10+ years of experience. He writes for Business Universe PR on AI, startups, and innovation in business. He’s also a published author and helps brands grow online. Areas of Expertise: Artificial Intelligence & Automation Startup Ecosystem & Innovation Digital Marketing & Lead Generation SOE Technology’s Social Impact "I write to decode technology, inform business, and empower ideas." 🔗 Connect on LinkedIn Areas of Expertise: Artificial Intelligence & Automation Startup Ecosystem & Innovation Digital Marketing & Lead Generation SOE Technology’s Social Impact I write to decode technology, inform business, and empower ideas.




