मथुरा : बाबा कढेरा विद्या मंदिर मे वसंत पंचमी का पर्व बड़ी धूम – धाम से मनाया गया और हवन यज्ञ, व् सांस्कृतिक प्रोग्राम किये गए. विद्यालय में आज के कार्यक्रम में प्रबन्ध निदेशक गौरव सिंह, ने छात्र – छात्राओं को बताया कि लोग रंगीन कपड़ों में तैयार होते हैं
और मौसमी खाद्य पदार्थों का आनंद लेते हैं। पतंग उड़ाते हैं और विभिन्न खेल खेलते हैं। इस त्योहार पर लोग आमतौर पर पीले वस्त्र पहनते हैं।
बसंत (वसंत) का रंग पीला है, जिसे ‘बसंती’रंग के रूप में भी जाना जाता है। यह समृद्धि, प्रकाश, ऊर्जा और आशावाद का प्रतीक है। यही कारण है कि लोग पीले कपड़े पहनते हैं और पीले रंग की वेशभूषा में पारंपरिक व्यंजन बनाते हैं।
प्राचार्य देवाशीष सेन ने बताया कि बसंत पंचमी, बसंत ऋतु की शुरुआत का प्रतीक है। बसंत का त्यौहार हिंदू लोगों में पूरी जीवंतता और खुशी के साथ मनाया जाता है।
हिंदी भाषा में, “बसंत / वसन्त”का अर्थ है ” बसंत”और “पंचमी”का अर्थ है पांचवें दिन। संक्षेप में, बसंत पंचमी को बसंत ऋतु के पांचवें दिन के रूप में मनाया जाता है।
बसंत पंचमी भारतीय महीने के पांचवें दिन माघ (जनवरी-फरवरी) में आती है। इस त्योहार को सरस्वती पूजा के नाम से भी जाना जाता है। शिक्षा प्रभारी एस. वी सिंह ने प्रकाश डालते हुए बताया कि बसंत पंचमी को ऋतुओं के राजा वसंत का आगमन माना जाता है।
मनुष्य ही नहीं, अन्य जीव-जन्तु, पेड़-पौधे भी खुशी से नाच रहे होते हैं। इस समय मौसम बहुत ही सुहावना हो जाता है। बसंत पंचमी को माँ सरस्वती के जन्मदिवस के रुप में भी मनाया जाता है।

इस दिन कोई भी शुभ काम शुरु करने का सबसे शुभ मुहूर्त माना जाता है। विद्यालय प्रबन्ध निदेशक गौरव सिंह, प्रबंधक प्रहलाद सिंह, प्राचार्य देवाशीष सेन, शिक्षा प्रभारी एस. वी सिंह, उपप्राचार्य रामबाबू, डॉ अशोक, कोऑर्डनैटर बिपिनसिंह, हेड मास्टर सुरेन्द्र सिंह, रामवीर सिंह, अपना शर्मा, एन.सी.सी. प्रभारी गोविन्द सिंह, राकेश रहेजा, चंद्रेश यादव , ओमप्रकाश, रोहताश, सतीश आदि उपस्थित रहे ।
Author: theswordofindia
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