Search
Close this search box.

Ramzan इस्लाह-ए-नफ़्स और ख़िदमत-ए-इंसानियत का बाबरकत महीना

Ramzan Message

Share this post

मसौली बाराबंकी :  Ramzan इस्लाह-ए-नफ़्स और ख़िदमत-ए-इंसानियत का बाबरकत महीना . मुक़द्दस माह-ए-रमज़ानुल मुबारक की आमद के मौक़े पर मशहूर शायर अदीब और साप्ताहिक सदा-ए-बिस्मिल के संपादक ज़की तारिक़ सआदतगंज (बाराबंकवी) ने अपने जारी किए गए बयान में कहा है

कि रमज़ानुल मुबारक इंसान की रूहानी तरबियत, अख़लाक़ी इस्लाह और सामाजिक बेदारी का महीना है जो इंसान को सब्र तक़वा और ख़िदमत-ए-ख़ल्क़ का अमली दर्स देता है।

उन्होंने कहा कि रोज़ा सिर्फ भूख और प्यास बर्दाश्त करने का नाम नहीं बल्कि अपने नफ़्स पर क़ाबू पाने, दूसरों के दर्द को महसूस करने और समाज में मोहब्बत व हमदर्दी को फ़रोग़ देने का ज़रिया है। रमज़ान हमें यह पैग़ाम देता है

कि हम अपनी ज़िंदगियों में सादगी, दयानतदारी और बर्दाश्त को फ़रोग़ दें और आपसी इख़्तिलाफ़ात को ख़त्म करके भाईचारे की फ़िज़ा क़ायम करें।

उन्होंने अवाम से अपील की कि इस बाबरकत महीने में ग़रीबों, यतीमों, बेवाओं और ज़रूरतमंद अफ़राद की दिल खोलकर मदद की जाए।

उन्होंने कहा कि ज़कात, सदक़ात और ख़ैरात का असल मक़सद समाज में मआशी तवाज़ुन क़ायम करना और महरूम तबक़ात को सहारा देना है, इसलिए रमज़ान को सिर्फ रस्मी इबादात तक महदूद न रखा जाए, बल्कि इसे अमली इंसान-दोस्ती का महीना बनाया जाए।

Ramzan Message

उन्होंने नौजवान नस्ल को ख़ुसूसी तौर पर मुख़ातिब करते हुए कहा कि वह रमज़ानुल मुबारक के दौरान अपनी तवानाइयों को मुसबत सरगर्मियों में सरफ़ करें सोशल मीडिया पर ज़िम्मेदाराना रवैया अपनाएँ और समाज में अमन रवादारी और अख़लाक़ी अक़दार के फ़रोग़ का ज़रिया बनें।

अपने बयान के इख़्तिताम पर उन्होंने दुआ की कि अल्लाह तआला इस मुक़द्दस महीने की रहमतों और बरकतों से मुल्क व क़ौम को मालामाल फ़रमाए, समाज में इत्तेहाद व यगानगत को मज़बूत करे और हम सबको रमज़ानुल मुबारक के हक़ीक़ी पैग़ाम पर अमल करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए।

theswordofindia
Author: theswordofindia

Latest News Uttar Pradesh और News Portal Lucknow पर पढ़ें ताज़ा खबरें। उत्तर प्रदेश समाचार पोर्टल और हिंदी न्यूज़ पोर्टल 'The Sword of India News' से जुड़ी राजनीति, व्यापार, अपराध और चुनाव की हर अपडेट सबसे पहले पाएँ।

ख़ास ख़बरें

ताजातरीन

[the_ad id="4088"]