चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि वोट चोरी के आरोप सामने आने के बावजूद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को संरक्षण दिया जा रहा है।
खड़गे के मुताबिक, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर की जानकारी सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई थी,
लेकिन चुनाव आयोग ने व्यापारिक गोपनीयता का हवाला देकर जानकारी देने से इनकार कर दिया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में फॉर्म-6 के 16.18 लाख आवेदनों का विवरण सार्वजनिक नहीं किए जाने का भी मुद्दा उठाया।
कांग्रेस अध्यक्ष ने पीलीभीत में 10,470 मतदाताओं के रिकॉर्ड में कथित अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 की जांच के आदेश दिए गए हैं।
खड़गे ने इंडिया गठबंधन की ओर से तीन प्रमुख मांगें रखीं। इनमें मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा और उन्हें संरक्षण देने वाले कानून को निरस्त करना, एसआईआर पर तत्काल रोक लगाना तथा कथित तौर पर हटाए गए पात्र मतदाताओं के नाम बहाल करना शामिल है।
गठबंधन ने सभी चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग भी उठाई। इसके साथ ही खड़गे ने लोगों से एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित होने वाली ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ रैली में शामिल होने की अपील की। चुनावी पारदर्शिता का मुद्दा अब राजनीतिक बहस के केंद्र में है।
Author: theswordofindia
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