मुंबई : के विलेपार्ले इलाके में दिसंबर की शुरुआत शतरंज प्रेमियों के लिए यादगार बन गई, जब एफएमसीए–आरवाईपी विले पार्ले चेस फेस्टिवल 2025 का भव्य आयोजन किया गया।
6 और 7 दिसंबर को चले इस दो दिवसीय शतरंज महोत्सव ने पूरे क्षेत्र को मानो बुद्धिबल का रणांगण बना दिया। 6 दिसंबर को बच्चों के लिए विभिन्न आयु वर्गों की प्रतियोगिताएँ आयोजित हुईं, जबकि 7 दिसंबर को ओपन कैटेगरी और रोमांचक ब्लिट्ज टूर्नामेंट खेले गए।
इस आयोजन में मुंबई, नवी मुंबई, ठाणे, कल्याण, पालघर, पुणे, वापी, वलसाड और इंदौर जैसे शहरों से 400 से अधिक खिलाड़ियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
अंडर–6 से लेकर अंडर–15 तक कुल आठ आयु वर्गों में मुकाबले हुए। प्रत्येक वर्ग में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों को ट्रॉफी और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया।
इसके साथ ही लड़कियों के लिए विशेष पुरस्कार, सबसे छोटे प्रतिभागी (लड़का व लड़की), सर्वश्रेष्ठ वरिष्ठ खिलाड़ी तथा तीन उत्कृष्ट अनरेटेड खिलाड़ियों को नकद पुरस्कार प्रदान किए गए।
अंडर–6 और अंडर–7 वर्ग के सभी बच्चों को सहभागिता पदक देकर उनका मनोबल बढ़ाया गया। दोनों दिनों की रैपिड प्रतियोगिता 15 मिनट + 3 सेकंड इंक्रीमेंट के समय नियंत्रण में खेली गई, जबकि ब्लिट्ज मुकाबले 3 मिनट + 2 सेकंड के प्रारूप में हुए।
प्रतियोगिता फिडे नियमों के अनुसार संपन्न हुई और सबर्बन डिस्ट्रिक्ट चेस एसोसिएशन का मार्गदर्शन प्राप्त रहा। मुख्य निर्णायक के रूप में फिडे अर्बिटर विश्वनाथ माधव ने अहम भूमिका निभाई।
समापन समारोह में द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित रघुनंदन गोखले और वरिष्ठ प्रशिक्षक सजनदास जोशी की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा बढ़ाई।

फर्स्ट मूव चेस अकादमी के संस्थापक और फिडे प्रमाणित नेशनल चेस इंस्ट्रक्टर अमर गोडबोले ने बताया कि वे पिछले एक दशक से बच्चों को उच्चस्तरीय प्रशिक्षण दे रहे हैं।
आज भारत शतरंज के स्वर्णिम दौर में प्रवेश कर चुका है। विश्वनाथन आनंद द्वारा रखी गई मजबूत नींव पर चलते हुए गुकेश, प्रग्गनंधा, कोनेरु हम्पी और दिव्या देशमुख जैसी युवा प्रतिभाएँ विश्व मंच पर देश का गौरव बढ़ा रही हैं।
Author: theswordofindia
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