लखनऊ : 77th Republic Day के अवसर पर गुजरात के कच्छ जिले में स्थित धोरडो, ग्रेट रण ऑफ कच्छ में राष्ट्रभक्ति और स्वदेशी चेतना का अद्भुत दृश्य देखने को मिला।
इस अवसर पर खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) द्वारा दुनिया के सबसे विशाल खादी से निर्मित राष्ट्रीय ध्वज का भव्य प्रदर्शन किया गया, जिसने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया।
सफेद नमक के विस्तृत रेगिस्तान के बीच शान से लहराता यह विशाल तिरंगा भारत की सांस्कृतिक विरासत, आत्मनिर्भरता और खादी की गौरवशाली परंपरा का प्रतीक बन गया।
देश के विभिन्न राज्यों से लाखों खादी कारीगरों ने वीडियो संदेशों के माध्यम से इस ऐतिहासिक तिरंगे को सलामी देकर एक अनोखा राष्ट्रीय कीर्तिमान स्थापित किया।
इस ऐतिहासिक अवसर पर भारतीय सेना और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों ने तिरंगे को पूर्ण सैन्य सम्मान प्रदान किया। कार्यक्रम के दौरान केवीआईसी अध्यक्ष द्वारा भारतीय सेना के शहीद जवान सार्जेंट मुरलीधर की पत्नी श्रीमती राजकुमारी को सम्मानित किया गया,
जिससे माहौल भावुक हो उठा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केवीआईसी अध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि कच्छ के रण में विशाल खादी तिरंगे का प्रदर्शन देश के लिए गर्व का क्षण है और यह कार्यक्रम देश की रक्षा में तैनात वीर जवानों को समर्पित है।
उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में खादी आंदोलन को मिली नई पहचान का उल्लेख करते हुए इसे आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव बताया।

उन्होंने बताया कि यह तिरंगा 225 फीट लंबा, 150 फीट चौड़ा और लगभग 1400 किलोग्राम वजनी है, जिसे 70 कारीगरों ने 49 दिनों में तैयार किया।
26 जनवरी को भुज भूकंप की 25वीं बरसी होने के कारण कार्यक्रम में कच्छ की पुनर्निर्माण यात्रा और अदम्य साहस को भी याद किया गया। यह आयोजन खादी, राष्ट्रभक्ति और भारत की सामूहिक चेतना का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा।
Author: theswordofindia
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