मुम्बई : समय और समाज में जब जब जो बदलाव हुए हैं वे जस के तस समकालीन हिंदी कहानी में उभरे हैं।समकालीन हिंदी कहानी के स्त्री पात्र उन बदलावों के प्रतीक हैं।
वे स्त्री पात्र अपनी परम्परा और समय की लय पर खरी उतरीं हैं।’ यह विचार कवयित्री व आकाशवाणी ,मुम्बई की पूर्व कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती कमलेश पाठक ने SIES कॉलेज ,सायन में ‘कैम्पस में रचनाकार’ कार्यक्रम के अंतर्गत ‘समकालीन हिंदी कहानी में स्त्री पात्र’ विषय पर व्यक्त किये।
उन्होंने जयशंकर प्रसाद की ‘पुरस्कार’,मन्नू भंडारी की ‘यहां से वहां तक’, कविता की ‘उलटबांसी’ और दुष्यंत की ‘अदीब का दूसरा प्यार’ कहानी का जिक्र करते हुए उन्हें विश्लेषित भी किया।
कथाकार,पत्रकार हरीश पाठक ने कहा,’ समाज बदला, समय बदला, सोच बदला और बदले विचार।इनके सँग-साथ बदली समकालीन हिंदी कहानी की स्त्री पात्र।कहानी वही दर्शायेगी जो समाज मे घटा है या घट रहा है।’
उन्होंने शिवानी ,मालती जोशी ,चित्रा मुदगल,ममता कालिया की कहानियों का संदर्भ देते हुए शिवेंद्र,रवींद्र कात्यायन,उर्मिला शिरीष, उमा और कुणाल सिंह की कहानियों का विस्तृत जिक्र किया और कहा बदलते समाज का आईना है
आज की हिंदी कहानी के स्त्री पात्र’। कॉलेज के इस अति लोकप्रिय आयोजन के संयोजक हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ दिनेश पाठक ने संचालन करते हुए कहा,’ कहानी सत्य की हत्या न करे।वह सच को पाठकों तक पहुँचाये यही आज समय की जरूरत है। अंत में दोनों रचनाकारों ने छात्रों के सवालों के जवाब भी दिए।
Author: theswordofindia
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