गोरखपुर : 13 years तक बार-बार इलाज करवाना और हर बार बिना सफलता के वापस लौट आना किसी भी दंपति के लिए बेहद दुखदायी अनुभव होता है।
33 वर्षीय आशा* और उनके 38 वर्षीय पति मनीष* (*नाम गोपनीयता के लिए बदले गए हैं) भी इसी दौर से गुज़र रहे थे, जब वे पहली बार डॉ. आकृति गुप्ता, सेंटर हेड और कंसल्टेंट, बिरला फर्टिलिटी एंड आईवीएफ, गोरखपुर से मिले।
इससे पहले वे दो बार आईयूआई और तीन बार आईवीएफ करा चुके थे। शुरुआती दो आईवीएफ चक्र अपने अंडाणु और शुक्राणु से किए गए, जबकि तीसरे साइकल में डोनर अंडाणु और डोनर शुक्राणु का सहारा लिया गया।
लेकिन इतने प्रयासों के बावजूद गर्भ नहीं ठहर पाया। महिला के इलाज का इतिहास भी जटिल रहा था। दोनों अंडवाहिनी नलिकाओं में पानी भर जाने (हाइड्रोसाल्पिंक्स) की समस्या के कारण उनकी दूरबीन विधि से शल्यक्रिया की गई थी।
इसके अलावा 2021 में डिम्बग्रंथि में बनी गांठ को हटाने के लिए भी ऑपरेशन करना पड़ा। अंडाणुओं की संख्या पहले से ही बहुत कम थी – उनका एएमएच स्तर सिर्फ़ 0.16 था। वहीं, पति के वीर्य की गुणवत्ता भी सामान्य से कम पाई गई।

अलग-अलग देखें तो हर समस्या संभाली जा सकती थी, लेकिन सब मिलकर गर्भधारण को वर्षों से कठिन बनाए हुए थीं। बिरला फर्टिलिटी एंड आईवीएफ, गोरखपुर में इलाज को लेकर बातचीत बिना जल्दबाज़ी और पूरी स्पष्टता के साथ की गई।
बहुत कम अंडाणु भंडार और लंबे इलाज इतिहास को देखते हुए, पति के शुक्राणु के साथ डोनर अंडाणु से आईवीएफ करने का निर्णय लिया गया। इस बार लक्ष्य था – हर उस कारक को नियंत्रित करना, जो नतीजों में अनिश्चितता पैदा कर सकता था।
डोनर अंडाणु प्राप्त करने के साथ-साथ, विशेष तकनीक की मदद से शुक्राणुओं का चयन किया गया, ताकि कम संख्या के बावजूद बेहतर गुणवत्ता वाले शुक्राणु इस्तेमाल किए जा सकें।
इससे दो अच्छे गुणवत्ता के भ्रूण तैयार हुए। भ्रूण स्थानांतरण में जल्दबाज़ी करने के बजाय, अगला कदम सोच-समझकर उठाया गया। भविष्य में किसी जेनेटिक समस्या से बचने के लिए दोनों भ्रूणों की आनुवंशिक जांच कराई गई।
रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि दोनों भ्रूण पूरी तरह सामान्य थे। इसके बाद ध्यान गर्भाशय की तैयारी पर दिया गया। जांच के दौरान गर्भाशय के भीतर मौजूद एक छोटी-सी समस्या को दूर करने के लिए हिस्टेरोस्कोपी के ज़रिए पॉलिप हटाया गया।

साथ ही यह जानने के लिए एक विशेष जांच की गई कि गर्भाशय भ्रूण को स्वीकार करने के लिए किस समय सबसे अधिक तैयार रहता है। इस जांच में सामने आया कि इस महिला में भ्रूण के जमने का सही समय सामान्य से थोड़ा आगे, यानी 108 घंटे पर था।
Author: theswordofindia
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