मुंबई : महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी के अधिकार क्षेत्र में आने वाले राज्य के 16 ज़ोन में 1.4.2019 के बाद नए निर्मित 329 उपकेंद्रों में 33/22 के.वी. उपकेंद्रों पर कार्यरत 1316 कर्मचारी (प्रति उपकेंद्र 3 कंत्राटी मशीन ऑपरेटर और 1 सफाई कर्मचारी) को 1 अगस्त 2025 से मे. स्मार्ट सर्विस लिमिटेड और मे. क्रिस्टल सर्विस लिमिटेड इन दो कंपनियों के माध्यम से ठेका पद्धति पर पूरी तरह संचालित करने का निर्णय लिया गया है।
उपभोक्ताओं को निर्बाध और सुचारू बिजली आपूर्ति देने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार किए गए इन उपकेंद्रों को निजी ठेकेदारों को सौंपे जाने का महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी वर्कर्स फेडरेशन ने शुरू से विरोध किया है।
संघटना की ओर से यह मांग की गई थी कि इन सभी उपकेंद्रों पर मशीन ऑपरेटर के पद स्वीकृत कर एम.पी.आर. जारी किया जाए। प्रशासन ने भी आश्वासन दिया था कि एम.पी.आर. शीघ्र ही मंजूर किया जाएगा।
लेकिन अचानक प्रशासन ने अपना निर्णय बदलकर सभी उपकेंद्रों को निजी ठेकेदारों के हवाले कर दिया। विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक मे. स्मार्ट सर्विस लिमिटेड और मे. क्रिस्टल सर्विस लिमिटेड ये दोनों कंपनियाँ दो बड़े राजनीतिक नेताओं से जुड़ी हुई हैं।
1 अगस्त 2025 से इन 329 उपकेंद्रों पर काम करने वाले ठेका-आधारित मशीन ऑपरेटरों को पिछले 4 महीनों से वेतन नहीं मिला है।

इस गंभीर मुद्दे को महावितरण कंपनी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक . लोकेशचंद्र और मानव संसाधन निदेशक राजेंद्र पवार के संज्ञान में लाने पर उन्होंने 28 नवम्बर 2025 को दोनों ठेकेदार कंपनियों की बैठक मुख्यालय, मुंबई में लेकर दो दिनों के भीतर सभी कर्मचारियों को वेतन देने के निर्देश दिए थे।
लेकिन दो दिनों की अवधि बीत जाने के बाद भी कई क्षेत्रों में मशीन ऑपरेटर व सफाई कर्मचारियों को वेतन नहीं दिया गया है। संघटना ने इस मुद्दे को दोबारा उठाया है।
4 महीनों से उपकेंद्रों में नियुक्त ठेका कर्मचारियों पर उपासमारी की नौबत आ चुकी है। 1.08.2025 से अब तक 1316 कर्मचारियों के वेतन का भुगतान नहीं किया गया है।
साथ ही भविष्य निर्वाह निधि (PF), ESIC कार्ड, दुर्घटना बीमा पॉलिसी भी जारी नहीं की गई है। कर्मचारी पूछ रहे हैं—यदि कार्य के दौरान कोई दुर्घटना हो गई तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? अक्टूबर माह में दिवाली जैसे बड़े त्योहार के दौरान भी इन सभी कर्मचारियों की दिवाली अंधेरे में गुज़री।

संबंधित ठेकेदार कंपनियों ने महावितरण के टेंडर नियमों का उल्लंघन किया है, इसलिए दोनों एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट किया जाए और एम.पी.आर. तत्काल मंजूर कर स्थायी पदों को स्वीकृति दी जाए—यह मांग महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी वर्कर्स फेडरेशन के कॉमरेड मोहन शर्मा (अध्यक्ष), कॉमरेड कृष्णा भोयर (सरचिटणीस), कॉमरेड एन.वाई. देशमुख (सरचिटणीस) और कॉमरेड दत्ता पाटिल (सचिव), तथा विद्युत उद्योग के कंत्राटी बाह्य स्त्रोत कामगार संघटना ने एक निवेदन के माध्यम से की है।
Author: theswordofindia
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