बरेली : फोर्ब्स 30 अंडर 30 इंडिया में बरेली के फरमान मियां शामिल। खामोशी से समाज के लिए काम करने वालों की पहचान जब वैश्विक मंच पर होती है, तो वह केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं रहती, बल्कि पूरे समाज के लिए गौरव का विषय बन जाती है।
कुछ ऐसा ही हुआ है बरेली के फरमान हसन खान उर्फ फरमान मियां के साथ, जिनका नाम प्रतिष्ठित फोर्ब्स 30 अंडर 30 इंडिया–2026 सूची में शामिल किया गया है।
सोशल इम्पैक्ट कैटेगरी में उनका चयन इस बात का प्रमाण है कि जमीनी स्तर पर की गई निरंतर सेवा भी आज की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
दरगाह आला हजरत से जुड़े प्रमुख संगठन जमात रज़ा-ए-मुस्तफा के राष्ट्रीय महासचिव और आला हजरत ताजुश्शरिया वेलफेयर सोसाइटी के संस्थापक फरमान मियां ने समाजसेवा को केवल आयोजन नहीं, बल्कि एक सतत व्यवस्था के रूप में स्थापित किया है।
शिक्षा, स्वास्थ्य और मानवीय सहायता के क्षेत्र में उनका योगदान वर्षों से बिना किसी प्रचार के चलता आ रहा है। फोर्ब्स की सूची यह दर्शाती है
कि अब नेतृत्व का अर्थ केवल मंच, शोहरत या कॉरपोरेट दुनिया तक सीमित नहीं रहा। आज वह नेतृत्व सराहा जा रहा है, जो समाज के कमजोर वर्गों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला सके। फरमान मियां का चयन इसी सोच का प्रतिनिधित्व करता है।
एलएलबी तक शिक्षित फरमान मियां मानते हैं कि शिक्षा ही समाज को आत्मनिर्भर बनाने का सबसे सशक्त माध्यम है। गरीब और पिछड़े वर्ग के बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करना, मेडिकल और प्रोफेशनल शिक्षा को लेकर जागरूकता फैलाना, और युवाओं को सही दिशा देना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। विशेष रूप से नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर वे लगातार छात्रों का मार्गदर्शन करते रहे हैं।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी उनका कार्य उल्लेखनीय रहा है। मुफ्त मेडिकल कैंप, गंभीर बीमारियों के इलाज में सहायता, कैंसर रोगियों का उपचार, टीबी-मुक्त भारत अभियान में योगदान और नेत्र चिकित्सा जैसे प्रयास उनके सेवा मॉडल का हिस्सा हैं। महिलाओं और युवाओं के लिए शिक्षा व कंप्यूटर साक्षरता कार्यक्रम भी उनके कार्यों में शामिल हैं।
उनकी सेवाओं को पूर्व में भी कई राष्ट्रीय संस्थानों द्वारा मान्यता मिल चुकी है। भारत सरकार द्वारा भारत गौरव रत्न सम्मान, स्वास्थ्य मंत्रालय की सराहना, राष्ट्रीय महिला आयोग और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से मिली पहचान तथा कर्नाटक की भारत यूनिवर्सिटी से मानद डॉक्टरेट उनकी उपलब्धियों को दर्शाती है।
आज फरमान मियां का नाम फोर्ब्स की उसी सूची में शामिल है, जिसमें अनन्या पांडे, सिद्धांत चतुर्वेदी, अनीत पड्डा, लक्ष्य लालवानी और जसप्रीत बुमराह जैसे चर्चित चेहरे मौजूद हैं। यह साबित करता है
कि समाजसेवा भी उतनी ही प्रभावशाली और महत्वपूर्ण है। दरगाह आला हजरत से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंची यह पहचान उस सोच की जीत है, जो मानती है कि इंसानियत, सेवा और ईमानदार प्रयास ही सच्ची कामयाबी की बुनियाद हैं।
Author: theswordofindia
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