बरेली : परंपरा, उत्कृष्ट कारीगरी और ग्राहकों के विश्वास को साथ लेकर संजय अग्रवाल पारिवारिक आभूषण व्यवसाय को नई पहचान देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
वर्ष 1930 से शुरू हुई इस विरासत को अब तीसरी पीढ़ी आगे बढ़ा रही है। उनका प्रयास पारंपरिक आभूषण कला को आधुनिक ग्राहकों की पसंद के अनुरूप नया स्वरूप देना है।
संजय अग्रवाल ने महज 16 वर्ष की उम्र में अपने दादाजी स्वर्गीय राम कुमार अग्रवाल के साथ काम करना शुरू किया था।
इसी दौरान उन्हें आभूषण निर्माण की बारीकियों, गुणवत्ता और पारंपरिक शिल्प को करीब से समझने का अवसर मिला। वर्षों के अनुभव ने उन्हें इस क्षेत्र में अपनी पारिवारिक परंपरा को आगे बढ़ाने की प्रेरणा दी।
ग्राहकों की पसंद और विश्वास पर विशेष जोर
संजय अग्रवाल का मानना है कि आभूषण केवल सजावट का साधन नहीं, बल्कि भावनाओं, रिश्तों और यादगार पलों से भी जुड़े होते हैं। इसी सोच के तहत वे ग्राहकों की जरूरतों और व्यक्तिगत पसंद को महत्व देते हैं।
‘विरासत’ के जरिए परंपरा और आधुनिकता का संगम
इसी दृष्टिकोण के साथ उन्होंने ‘विरासत बाय राम कुमार अग्रवाल जेम्स एंड ज्वेल्स’ की परिकल्पना की है। इसका उद्देश्य पारिवारिक मूल्यों और पारंपरिक कारीगरी को आधुनिक अपेक्षाओं के साथ जोड़ना है।
वर्षों से संजोई गई गुणवत्ता, आत्मीयता और विश्वास की पहचान को आगे बढ़ाने की यह पहल दर्शाती है कि मजबूत परंपरा नई सोच के साथ आने वाली पीढ़ियों तक पहुंच सकती है।
Author: theswordofindia
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