उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है।
पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में एक ही मतदाता पहचान संख्या (ईपीआईसी) पर अलग–अलग विवरण दर्ज होने की शिकायतों के बीच निर्वाचन विभाग की जांच में भी अनियमितताएं सामने आई हैं।
कांग्रेस नेताओं ने 21 अक्टूबर को लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि अप्रैल 2026 में अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद जुलाई से सितंबर के बीच 13,150 मतदाताओं के नाम बदल दिए गए, जबकि उनके ईपीआईसी नंबर और क्रमांक समान रहे।
पार्टी ने नाम हटाने और नए मतदाताओं को जोड़ने में भी गड़बड़ी का आरोप लगाया है। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की 22 अक्टूबर की विज्ञप्ति के अनुसार, पीलीभीत सदर में मई से अगस्त के बीच कुल 13,779 फॉर्म-8 दर्ज हुए।
इनमें 10,470 आवेदन स्वीकृत और 3,309 निरस्त किए गए।जांच के दौरान इन आवेदनों से संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिले और स्वीकृत आवेदनों तथा अपडेटेड प्रविष्टियों में अनियमितताएं पाई गईं।
विभाग ने संबंधित कंप्यूटर सहायक के विरुद्ध सेवा समाप्ति और तत्कालीन निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सभी स्वीकृत आवेदनों की दोबारा जांच भी प्रस्तावित है।
इस बीच, मतदाता सूचियों की स्वतंत्र पड़ताल में बरेली और पीलीभीत में अलग–अलग ईपीआईसी नंबरों पर समान विवरण दर्ज होने के उदाहरण सामने आने की रिपोर्ट है। मामले में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।
Author: theswordofindia
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