मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 6 में अतिरिक्त जानकारी को लेकर बहस तेज है। खासतौर पर SIR के दौरान ऑनलाइन प्रक्रिया में पुराने मतदाता रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी मांगे जाने को लेकर सवाल उठे हैं।
मामला अब चुनावी प्रक्रिया और आयोग की शक्तियों से जुड़े व्यापक कानूनी सवालों के बीच देखा जा रहा है। निर्वाचन आयोग के अनुसार, फॉर्म 6 नए मतदाता के रूप में नाम दर्ज कराने के लिए है।
18 वर्ष या उससे अधिक उम्र पूरी कर चुके पात्र भारतीय नागरिक इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। आयोग के पोर्टल पर फॉर्म 6 के साथ संबंधित घोषणा-पत्र की सुविधा भी उपलब्ध है।
फॉर्म 6 में आवेदक का नाम, जन्मतिथि, पता और अन्य आवश्यक विवरण लिए जाते हैं। वहीं फॉर्म 7 मौजूदा मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने पर आपत्ति या नाम हटाने के लिए तथा फॉर्म 8 पते में बदलाव, विवरण सुधार, EPIC बदलने और दिव्यांग मतदाता संबंधी अनुरोधों के लिए इस्तेमाल होता है।
SIR से संबंधित निर्देशों में आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 324, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम और संबंधित नियमों के तहत अपनी शक्तियों का उल्लेख किया सुप्रीम कोर्ट भी SIR की वैधानिकता, प्रक्रिया और चुनाव आयोग की शक्तियों से जुड़े सवालों पर विचार कर चुका है।
ऐसे में फॉर्म 6 में अतिरिक्त जानकारी जोड़ने की प्रक्रिया भी कानूनी और प्रशासनिक बहस का हिस्सा बनी हुई है।
Author: theswordofindia
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