लखनऊ : देश में तेजी से बढ़ रही जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों और नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज़ (एनसीडी) को लेकर आयोजित SPARK Health Dialogue में विशेषज्ञों ने सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने बढ़ती चुनौतियों पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
कार्यक्रम का आयोजन सोशल एंड इकोनॉमिक सस्टेनेबिलिटी रिसर्च (SESR) फाउंडेशन ने किया, जिसमें मुंबई के रिजेनरेटिव मेडिसिन और स्टेम सेल विशेषज्ञ डॉ. बी.एस. राजपूत मुख्य वक्ता रहे।
डॉ. राजपूत ने कहा कि बदलती जीवनशैली, शारीरिक निष्क्रियता, असंतुलित खान-पान, मोटापा और बढ़ती औसत आयु के कारण डायबिटीज़, हाइपरटेंशन, गठिया और अन्य दीर्घकालिक बीमारियों के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है।

उन्होंने कहा कि केवल इलाज पर निर्भर रहने के बजाय रोकथाम, समय पर स्क्रीनिंग और वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित उपचार को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि भारत में होने वाली अधिकांश मौतें गैर-संचारी रोगों से जुड़ी हैं, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर आर्थिक और चिकित्सीय दबाव बढ़ रहा है।
संवाद में स्टेम सेल थेरेपी और रिजेनरेटिव मेडिसिन को चयनित मरीजों के लिए संभावित सहायक उपचार के रूप में प्रस्तुत किया गया, लेकिन इसके उपयोग में वैज्ञानिक प्रमाण और नियामकीय मानकों के पालन पर विशेष जोर दिया गया।

विशेषज्ञों ने आयुष्मान भारत सहित सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं और जनजागरूकता अभियानों को भी दीर्घकालिक बीमारियों की रोकथाम और बेहतर उपचार के लिए महत्वपूर्ण बताया।
Author: theswordofindia
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