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Urs-e-Bashiri and Manjuri में पहले कुल शरीफ, 12 छात्रों की दस्तारबंदी

Urs-e-Bashiri and Manjuri

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बहेड़ी : नगर की मशहूर खानकाह-ए-आलिया मंजूरिया शाहिदिया जामिया गौसिया बशीरूल उलूम, मुशेखूपुर में आयोजित 80वें सालाना दो दिवसीय उर्स-ए-बशीरी व मंजूरी के दूसरे दिन अकीदत और उत्साह का माहौल रहा।

इस दौरान जायरीनों की भारी भीड़ उमड़ी और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम की शुरुआत फज्र की नमाज के बाद सलातो-सलाम और हल्का-ए-जिक्र से हुई।

दिनभर जायरीन ने हजरत शाह सय्यद मंजूर अली मियां और हजरत मौलाना सय्यद शाहिद अली मियां के मजार पर फातिहा पढ़कर चादरपोशी व गुलपोशी की।

लोगों ने सज्जादानशीन सय्यद फैजी मियां से मुलाकात कर विशेष दुआएं भी कराईं। नमाज-ए-असर के बाद पहले कुल शरीफ की महफिल आयोजित हुई।

कुरआन की तिलावत, नात और मनकबत के बाद मौलाना खलीक शाहिदी ने तकरीर में औलिया-ए-किराम का सम्मान करने और उनके बताए रास्ते पर चलने की अपील की।

इसके बाद कुल शरीफ की रस्म अदा की गई और मुल्क में अमन-चैन के लिए दुआ हुई। मगरिब के बाद आम लंगर का आयोजन किया गया। वहीं, इशा की नमाज के बाद भव्य जलसा-ए-दस्तारबंदी हुआ।

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इसमें देश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे उलेमाओं ने तकरीर की और शायरों ने कलाम पेश किए। मदरसा जामिया गौसिया बशीरूल उलूम के 12 फारिग छात्रों को दस्तार बांधकर सम्मानित किया गया।

जलसा देर रात दो बजे तक चला। इसके बाद आखिरी कुल शरीफ की रस्म पूरी की गई। कार्यक्रम के दौरान पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए।

आयोजन को सफल बनाने में मौलाना नाजिमु कादरी, मौलाना खलीक शाहिदी, मुफ्ती हसन रजा मरकजी और कारी मुहम्मद ताहिर फैजानी सहित अन्य लोगों का योगदान रहा।

 

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Author: theswordofindia

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