नवी मुंबई : World Migratory Bird Day के अवसर पर शनिवार को नवी मुंबई के नेरुल क्षेत्र में पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने मौन मार्च निकालकर आर्द्रभूमि संरक्षण की जोरदार मांग की।
इस मार्च में एनआरआई और डीपीएस आर्द्रभूमि के बीच बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। प्रतिभागियों ने फ्लेमिंगो झीलों, मैंग्रोव और अन्य जलक्षेत्रों को बचाने के लिए तख्तियां और बैनर प्रदर्शित किए।
कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि लगातार हो रहे शहरी विकास और अवसंरचना परियोजनाओं के कारण आर्द्रभूमि तेजी से नष्ट हो रही है, जिससे न केवल प्रवासी पक्षियों का प्राकृतिक आवास खतरे में है,
बल्कि शहरी बाढ़ का जोखिम भी बढ़ रहा है। विशेषज्ञों ने बताया कि आर्द्रभूमि शहरों के लिए प्राकृतिक स्पंज की तरह कार्य करती है, जो भारी वर्षा के समय अतिरिक्त पानी को अवशोषित करती है।
पर्यावरण समूहों ने आरोप लगाया कि पानी के प्राकृतिक प्रवाह में बाधा और सीवेज प्रदूषण के कारण फ्लेमिंगो अब इन झीलों में उतरना बंद कर चुके हैं।
कार्यकर्ताओं ने ठाणे जिला आर्द्रभूमि समिति के फैसले पर भी सवाल उठाए, जिसमें कुछ झीलों को औपचारिक आर्द्रभूमि दर्जा देने से इनकार किया गया था।

संस्थाओं ने घोषणा की कि वे आगामी विश्व पर्यावरण दिवस तक जागरूकता अभियान जारी रखेंगे और आर्द्रभूमि संरक्षण के लिए कानूनी प्रयासों को तेज करेंगे।
Author: theswordofindia
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