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Ranglayer Rabi ने टैगोर की नाट्य विरासत को फिर जीवंत किया

Ranglayer Rabi

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नई दिल्ली : Ranglayer Rabi ने टैगोर की नाट्य विरासत को फिर जीवंत किया . 27 जुलाई। इंडिया हैबिटेट सेंटर के अमलतास ऑडिटोरियम में वांडरर्स फुटप्रिंट्स ट्रैवल बुटीक और स्थापना शांतिनिकेतन के संयुक्त सहयोग से आयोजित रंगलेयर रबी ने रवींद्रनाथ टैगोर की नाट्य विरासत को नए परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम का उद्देश्य बंगाली पब्लिक थिएटर और टैगोर के बीच रहे जटिल संबंधों को संगीत, नाट्य कथन और ऐतिहासिक तथ्यों के माध्यम से दर्शकों तक पहुंचाना था।

प्रकृति मुखोपाध्याय द्वारा संकल्पित इस प्रस्तुति में टैगोर के नाटकों तथा उनकी कहानियों, उपन्यासों और कविताओं पर आधारित लगभग 25 मंच-रूपांतरणों से चुने गए गीतों और रोचक प्रसंगों को शामिल किया गया।

कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि व्यावसायिक प्राथमिकताओं और तत्कालीन सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण बंगाली पब्लिक थिएटर टैगोर की मौलिक रंगदृष्टि को पूरी तरह आत्मसात नहीं कर सका।

इसके बावजूद टैगोर अपने नाटकों के मंचन में रुचि लेते थे और थिएटर की अभिनेत्रियों की अभिनय प्रतिभा की खुलकर सराहना करते थे। प्रस्तुति का समापन वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक परिवेश में टैगोर के नाटकों की प्रासंगिकता पर चर्चा के साथ हुआ।

Ranglayer Rabi

कार्यक्रम का वाचन अभिनेता और इंटरडिसिप्लिनरी कलाकार सुजॉय प्रसाद चटर्जी ने किया, जबकि संगीत प्रस्तुति प्रत्युष मुखोपाध्याय और प्रकृति मुखोपाध्याय ने दी। वाद्य संगत सुरजीत दास और नीलांजन सेनगुप्ता ने संभाली।

सुजॉय प्रसाद चटर्जी ने कहा कि यह प्रस्तुति उनके लिए समय की यात्रा जैसी है, जो संस्कृति, समाज और टैगोर की रचनात्मक भूमिका को गहराई से समझने का अवसर देती है।

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Author: theswordofindia

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