नई दिल्ली : टीईटी, नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में हिजाब या बुर्का पहनने वाली महिला अभ्यर्थियों से जुड़े नियमों को लेकर ऑल इंडिया उलेमा बोर्ड ने पुनर्विचार की मांग की है।
बोर्ड का कहना है कि परीक्षा की सुरक्षा और पारदर्शिता बनाए रखते हुए भी महिलाओं की धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना चाहिए।
बोर्ड के राष्ट्रीय महासचिव अंजर खान तथा मुंबई इकाई के अध्यक्ष आरिफ मेमन बापू द्वारा जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को समानता, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अपने धर्म का पालन करने का अधिकार प्रदान करता है।
ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया के दौरान किसी महिला को अपने धार्मिक विश्वासों से समझौता करने के लिए बाध्य करना उचित नहीं माना जा सकता। बोर्ड ने मांग की है कि हिजाब या बुर्का पहनने वाली महिला उम्मीदवारों को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी जाए।
साथ ही पहचान सत्यापन और सुरक्षा जांच की प्रक्रिया केवल महिला सुरक्षा कर्मियों द्वारा अलग कक्ष में कराई जाए, ताकि गोपनीयता और गरिमा दोनों बनी रहें।

उलेमा बोर्ड ने यह भी सुझाव दिया कि आधुनिक सुरक्षा तकनीकों और प्रभावी निगरानी व्यवस्था के माध्यम से परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सकती है। बोर्ड ने संकेत दिया है कि इस मुद्दे को लेकर महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों में भी अधिकारियों से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा जाएगा।
Author: theswordofindia
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