लखनऊ : Medanta Hospital के रेस्पिरेटरी एंड स्लीप मेडिसिन विभाग ने एक दुर्लभ और जटिल फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित मरीज का सफल उपचार कर चिकित्सा क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।
अस्पताल के विशेषज्ञों ने एनेस्थीसियोलॉजी विभाग के सहयोग से अत्याधुनिक ‘बाइलेटरल होल लंग लवेज’ प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया। जानकारी के अनुसार मरीज पल्मोनरी एल्वियोलर प्रोटीनोसिस नामक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित था।
इस रोग में फेफड़ों की वायु थैलियों यानी एल्वियोलाई में प्रोटीन और फैट युक्त सर्फैक्टेंट जमा होने लगता है, जिससे सांस लेने में परेशानी, लगातार खांसी और ऑक्सीजन की कमी जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं।
विशेषज्ञ डॉक्टरों ने हाई-रिजोल्यूशन सीटी स्कैन और ब्रोंकोएल्वियोलर लवेज साइटोलॉजी जांच के माध्यम से बीमारी की पुष्टि की। जांच के दौरान फेफड़ों से प्राप्त द्रव का रंग दूधिया पाया गया, जिसके बाद पीएएस स्टेनिंग टेस्ट द्वारा रोग की सटीक पहचान की गई।
मरीज के उपचार के लिए डॉक्टरों ने ‘होल लंग लवेज’ तकनीक अपनाई। इस प्रक्रिया में जनरल एनेस्थीसिया देकर फेफड़ों को गर्म सलाइन द्रव से कई बार साफ किया जाता है,
जिससे जमा प्रोटीन बाहर निकल जाता है और सांस लेने की क्षमता में सुधार होता है। इस जटिल प्रक्रिया को डॉ. अभिषेक टंडन और डॉ. विपुल प्रकाश ने सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
पूरी टीम का नेतृत्व रेस्पिरेटरी एंड स्लीप मेडिसिन विभाग के निदेशक डॉ. दिलीप दुबे ने किया। वहीं एनेस्थीसियोलॉजी टीम में डॉ. आशीष खन्ना और डॉ. निशांत चौधरी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अस्पताल प्रबंधन ने फिजियोथेरेपिस्ट और ऑपरेशन थिएटर टेक्नीशियंस के योगदान की भी सराहना की। मेदांता लखनऊ की यह सफलता जटिल और दुर्लभ बीमारियों के इलाज में आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञता और टीमवर्क का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जा रही है।
Author: theswordofindia
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